जनकपुरधाम, असोज ८ गते । वैज्ञानिक वन व्यवस्थापन के नाम मे चरम अनियमितता, चुरे क्षेत्र के दोहन आ संवेदनशील वन क्षेत्र विनाश भेल सार्वजनिक लेखा समिति अन्तर्गतको उपसमिति निष्कर्ष निकालक अछि ।
वैज्ञानिक वन व्यवस्थापन कार्यक्रमक बारे मे अध्ययन करवाक लेल गठित उपसमिति वैज्ञानिक वन व्यवस्थापन कार्यक्रम कार्यान्वयन सँ तराई, चुरे आ अन्य विभिन्न संवेदनशील क्षेत्र मे वन विनाश भ गम्भीर वातावरणीय जोखिम उत्पन्न भेल ठहर कएने छ ।
उक्त उपसमिति स्थलगत अध्ययन आ सरोकारवाला सँग कएने छलफल पश्चात बृहष्पित दिन लेखा लेखा समिति के बुझौने प्रतिवेदन मे वैज्ञानिक वन व्यवस्थापन कार्यविधि २०७१ त्रुटिपूर्ण रहल कहैत ओहि के खारेज करबाक सुझाव देने अछि ।
उक्त कार्यविधि के आधार मे तर्जुमा कायल गेल सामुदायिक वन आ साझेदारी वन तथा सरकारी वन के वैज्ञानिक व्यवस्थापन कार्ययोजनाक कारण तराई, चुरे क्षेत्र, जलाधार क्षेत्र, सिमसार क्षेत्र, वन्यजन्तु के जैविक मार्ग आ भूक्षय के दृष्टि सँ संवेदनशील क्षेत्र में वन विनाश भ गम्भीर वातावरणीय समस्या उत्पन्न भेल दाबी समेत उपसमिति कयने अछि ।
तहिना तराई आ भित्री मधेशक कृषि भूमि, जैविक विवधिता, जीविकोपार्जन आ भौतिक पूर्वाधार मे सेहो नाकारात्मक असर पडला सँ वैज्ञानिक वन व्यवस्थापन कार्यविधि २०७१ आ ओहि अन्तर्गत तर्जुमा भेल कार्य योजनासभ खारेज करए पडवाक उपसमिति निष्कर्ष निकाल्ने अछि ।
वन व्यवस्थापनक नाम मे वन अधिकृत, सामुदायिक आ साझेदारी वन समूह के पदाधिकारीसभ काठ मे चरम अनियमितता कयने सेहो उपसमिति प्रतिवेदन मे उल्लेख कयने अछि । उपसमिति चुरे क्षेत्र मे लागू कायल गेल वैज्ञानिक वन व्यवस्थापन कार्यक्रम रद्ध क दिगो वन व्यवस्थापन कार्ययोजनासभ तर्जुमा क कार्यान्वयन करबाक लेल वन मन्त्रालय के निर्देशन देबाक लेल सिफारिस कएने अछि ।
उपसमिति स्थलगत अध्ययन के क्रम मे अनियमितता कयने वन कार्यालयक अधिकारी आ सामुदायिक तथा साझेदारी वन समितिक पदाधिकारी सभके कारबाही करवाक लेल सरकार आ अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग के निर्देशन देबाक लेल सेहो सिफारिस कएने अछि ।
संघीय सांसद प्रदीप यादव नेतृत्व के उपसमिति वैज्ञानिक वन व्यवस्थापनक नाम मे गाछ कटान आ काठ तस्करी मे संलग्न वन कर्मचारी आ वन समूह पदाधिकारी सभके कारवाही करवाक लेल सम्बन्धित निकाय मे कायल गेल सिफारिस के विषय मे उपसमितिक मूल समिति मे छलफल होइत बात लेखा समितिक सचिव रोजनाथ पाण्डे जानकारी देने अछि ।
गत असार ५ गते गठित उपसमिति ३ महिना पश्चात वृहष्पित दिन मूल समिति समक्ष अध्ययन प्रतिवेदन बुझौने अछि । प्रतिवेदन उपर आओर विशेष छलफल क क परिमार्जन सहित मूल समिति सँ पारित कायल जाइत बात पाण्डे के कहब अछि । उक्त उपसमिति मे सांसदद्वय प्रेम आले आ मिना सुब्बा सदस्य रहल अछि ।
उपसमिति सिन्धुली, सर्लाही, रौतहट, बारा, पर्सा, नवलपरासी, कपिलवस्तु, बाँके, कैलाली आ कञ्चनपुर जिल्ला मे वैज्ञानिक वन व्यवस्थापन कार्यक्रमक नाम मे अख्तियार दुरुपयोग, भ्रष्टाचार आ अनियमितता मे संलग्न सामुदायिक आ साझेदारी वन समूह मे भेल अनियमितता आ ओहि मे संलग्न पदाधिकारी के विवरण समेत प्रतिवेदन मे सार्वजनिक कयने अछि ।

















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